सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना में संशोधन 

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • सरकार ने प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (PM E-DRIVE) योजना में संशोधन किया है, जिसके अंतर्गत ई-स्कूटर और ई-रिक्शा के लिए नई समय-सीमाएँ और यूनिट कैप निर्धारित किए गए हैं।

योजना में संशोधन

  • भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक दो-पहिया वाहनों के लिए सब्सिडी को 31 जुलाई 2026 तक और इलेक्ट्रिक रिक्शा व इलेक्ट्रिक कार्ट्स के लिए 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया है।
  • प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु अधिकतम एक्स-फैक्ट्री मूल्य इलेक्ट्रिक दो-पहिया वाहनों के लिए ₹1.5 लाख और इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों (ई-रिक्शा एवं ई-कार्ट्स) के लिए ₹2.5 लाख निर्धारित किया गया है।

PM E-DRIVE योजना के बारे में

  • यह योजना 2024 में भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी।
  • योजना की अवधि अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2026 तक थी, जिसे अब 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रोत्साहन योजना(EMPS-2024) को भी PM E-DRIVE योजना में सम्मिलित किया गया है।
  • योजना को निम्नलिखित घटकों के माध्यम से लागू करने का प्रस्ताव है:
    • सब्सिडी: ई-2W, ई-3W, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक और अन्य उभरती ईवी श्रेणियों के लिए मांग प्रोत्साहन।
    • पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान: ई-बसें, चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क की स्थापना एवं MHI की परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन।
    • योजना का प्रशासन: IEC (सूचना, शिक्षा एवं संचार) गतिविधियाँ तथा परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) के लिए शुल्क।
  • समर्थन हेतु पात्र वाहन श्रेणियाँ:
    • बसें (केवल इलेक्ट्रिक बसें)
    • तीन-पहिया (इलेक्ट्रिक) जिनमें पंजीकृत ई-रिक्शा एवं ई-कार्ट्स तथा L5 (ई-3W) शामिल हैं
    • दो-पहिया (इलेक्ट्रिक) – ई-2W
    • ई-एम्बुलेंस (इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड एवं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड)
    • ई-ट्रक एवं अन्य नई उभरती ईवी श्रेणियाँ (आगामी  चरण में अधिसूचित की जाएँगी)
  • चार्जिंग स्टेशन: योजना ईवी खरीदारों की “रेंज चिंता” को दूर करने हेतु सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (EVPCS) की स्थापना को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करती है।

इलेक्ट्रिक वाहन क्या हैं?

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आंतरिक दहन इंजन के बजाय विद्युत मोटर पर चलते हैं, जो ईंधन और गैसों के मिश्रण को जलाकर शक्ति उत्पन्न करता है।
  • इन्हें वर्तमान पीढ़ी के वाहनों के संभावित विकल्प के रूप में देखा जाता है ताकि प्रदूषण, वैश्विक तापन और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सके।

सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (2020) और FAME-I: इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और उत्पादन को तीव्र करने हेतु लागू।
  • FAME II (2019): ईवी अपनाने में वृद्धि, ई-बस नेटवर्क का विस्तार और चार्जिंग अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर केंद्रित।
  • PLI योजना (2021): ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग में उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों (AAT) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु।
    • प्रमुख कंपनियाँ जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ईवी उत्पादन में बड़े निवेश किए हैं।
    • कंपनियों को प्रोत्साहन हेतु कम से कम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
  • SPMEPCI (2024): वैश्विक ऑटोमोबाइल निर्माताओं को निवेश हेतु आकर्षित करने के लिए, स्वीकृत आवेदकों को पाँच वर्ष की अवधि में USD 35,000 मूल्य वाले ई-4W (CBU) को 15% कम सीमा शुल्क पर आयात करने की अनुमति।
  • भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक(IEMI, 2025): राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ईवी महत्वाकांक्षाओं की प्रगति को ट्रैक और तुलना करने हेतु।
    • दिल्ली, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ हालिया IEMI स्कोर में “फ्रंट-रनर्स” के रूप में अग्रणी हैं।
  • PM ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना(2024): 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती का समर्थन।
    • इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (PTAs) द्वारा चूक की स्थिति में ई-बस ऑपरेटरों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करना है।

स्रोत: TH

 

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